भारत 7 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस लक्ष्य को हासिल करने में प्रौद्योगिकी क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। संभावनाएं है कि प्रौद्योगिकी क्षेत्र जीडीपी में करीब 1,000 अरब डॉलर का योगदान दे सकता है। देश को सात लाख करोड़ डॉलर की जीडीपी बनाने के लिए तकनीकी क्षेत्र को नवाचार की अगुवाई करनी होगी और खासकर डीप टेक के जरिये।
भारत 2030 तक 7 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस लक्ष्य को हासिल करने में प्रौद्योगिकी क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका होगी, जो 2030 तक जीडीपी में करीब 1,000 अरब डॉलर का योगदान दे सकता है। इससे नवाचार को बढ़ावा मिलेगा, जो न सिर्फ भारत बल्कि वैश्विक समस्याओं के समाधान में सक्षम होगा। नैसकॉम के अध्यक्ष राजेश नांबियार ने कहा, भारत के भविष्य को आकार देने में प्रौद्योगिकी का बड़ा योगदान होगा। देश को सात लाख करोड़ डॉलर की जीडीपी बनाने के लिए तकनीकी क्षेत्र को नवाचार की अगुवाई करनी होगी और खासकर डीप टेक के जरिये। यह स्वास्थ्य और वित्तीय सेवाओं जैसे विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण बदलाव लाने में भी सहायक होगा।
स्टार्टअप महाकुंभ नांबियार का बयान
नांबियार ने बृहस्पतिवार को स्टार्टअप महाकुंभ के उद्घाटन पर कहा कि 2047 तक विकसित भारत बनने का दृष्टिकोण न सिर्फ आर्थिक वृद्धि से बल्कि प्रौद्योगिकी नवाचार से भी आकार लेगा। तीन से पांच अप्रैल तक नई दिल्ली में आयोजित स्टार्टअप महाकुंभ में 50 से अधिक देशों के स्टार्टअप, निवेशक और उद्योग प्रमुख शामिल हो रहे हैं।
