पिछले कुछ वर्षों से कश्मीर केंद्रित दलों, तथाकथित बुद्धिजीवियों और अलगाववादियों की ओर से जम्मू संभाग के राजौरी-पुंछ जिलों को पीर पंजाल और रामबन-डोडा-किश्तवाड़ जिलों को चिनाब रीजन के नाम से प्रचारित करने का असर बुधवार को जम्मू-कश्मीर विधानसभा में दिखा। इसपर सत्ताधारी नेकां और भाजपा विधायकों के बीच तीखी बहस हुई।
भाजपा विधायकों ने कहा कि कौन सा पीर पंजाल रीजन, पूरा जम्मू-कश्मीर एक है, यहां क्षेत्रवाद के नाम पर लोगों को बांटने का षड्यंत्र हो रहा है, जो हम विफल बनाएंगे। वहीं, नेकां विधायकों ने भाजपा पर पीर पंजाल के लोगों का अपना करने का आरोप लगाया और कहा कि इसके लिए हमारे लोगों ने कुर्बानियां दी हैं। भाजपा माफी मांगे।
‘मुझे नहीं पता पीर पंजा खित्ता कौन सा है’
भाजपा विधायक व नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा ने नेशनल ला यूनिवर्सिटी को पीर पंजाल क्षेत्र में स्थापित किए जाने की मांग पर गत दिनों कहा था, “मुझे नहीं पता कि यह पीर पंजाल खित्ता कौन सा है।” इस टिप्पणी पर बुधवार को विधानसभा में सत्ताधारी गठबंधन के विधायकों ने जोरदार हंगामा किया।
उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी, परिवहन मंत्री सतीश शर्मा की भाजपा नेताओं के साथ तीखी बहस भी हुई। डिक्सन प्लान नहीं चलेगा, हिंदुस्तान जिंदाबाद, वंदे मातरम, जीवे-जीवे जम्मू कश्मीर, पीर पंजाल जिंदाबाद के नारे सदन में गूंजे।
राजौरी-पुंछ से निर्वाचित कांग्रेस और नेकां के सभी विधायकों के साथ शोपियां के विधायक शब्बीर कूले, बनिहाल के विधायक सज्जाद शाहीन भी अपनी सीट से उठकर सदन में स्पीकर के आसन की तरफ बढ़े, लेकिन मार्शलों ने उन्हें रोक लिया। भाजपा विधायक भी अपनी सीटों से उठकर आगे आए और उनमें से कुछ ने पोस्टर जैसे कागज लहराए।