सोमवार (16 फरवरी, 2026) से शुक्रवार (20 फरवरी, 2026) तक चलने वाले आर्टिफिशियल इंटेलिजेंसके महाकुंभ एआई इंपैक्ट समिट 2026 में हिस्सा लेने के लिए दुनियाभर के दिग्गज दिल्ली पहुंच चुके हैं।
इस शिखर सम्मेलन के जरिये तेजी से बदलती एआई की दुनिया को समझना और आम लोगों तक इसके फायदे और असर को पहुंचाना आसान हो सकता है। समिट की महत्ता इसी बात से समझी जा सकती है कि इसमें न केवल टेक कंपनियों के दिग्गज, बल्कि अनेक देशों के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति भी हिस्सा ले रहे हैं।
एआई इंपैक्ट समिट क्या है?
इंडिया एआई इंपैक्ट समिट 2026 भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय और इंडिया एआई मिशन की पहल है। यह पांच दिन का कार्यक्रम है, जिसमें पॉलिसी, रिसर्च, इंडस्ट्री और आम भागीदारी, सबको जोड़ा गया है। सरकार ने इस समिट की थीम रखी है- सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय।
इस समिट में क्या होगा?
समिट में टेक लीडर्स एआई को लेकर भविष्य की योजना बताएंगे। एक्सपो में 300 से ज्यादा प्रोजेक्ट दिखाए जाएंगे। यहां लोग जान सकेंगे कि अभी एआई में क्या नया हो रहा है और भविष्य में क्या बदलाव आनेवाला है। विशेषज्ञ बताएंगे कि अब तक क्या रिसर्च हुई है और आगे किन विषयों पर काम चल रहा है। साथ ही एआई से जुड़ी चुनौतियों पर भी चर्चा होगी।
इससे पहले कहां हो चुकी है समिट?
साल 2023 में सबसे पहले एआई समिट ब्रिटेन में हुई थी। इसमें एआई से जुड़े खतरों और सुरक्षा पर चर्चा हुई थी। इसके बाद मई, 2024 में दक्षिण कोरिया में एआई को सुरक्षित और समावेशी बनाने पर जोर दिया गया था। फरवरी, 2025 में पेरिस में एआई एक्शन समिट में एआई को सार्वजनिक हित और टिकाऊ विकास से जोड़ने पर चर्चा हुई थी।
पिछली सभी समिट का क्या परिणाम रहा?
2023 में ब्रिटेन में हुई समिट में गोपनीयता, डाटा सुरक्षा, जवाबदेही और मानव निगरानी जैसे मुद्दों को उठाया गया। सियोल में एआई जोखिम को समझने और जांचने के लिए वैज्ञानिक सहयोग जरूरी बताया गया। पेरिस में 2025 की समिट में कहा गया कि एआई का उपयोग सार्वजनिक भलाई के लिए होना चाहिए।
दिल्ली की समिट की क्या है अहमियत?
दिल्ली समिट को सरकार ग्लोबल साउथ में पहली वैश्विक एआई समिट बता रही है। इस बार चर्चा सिर्फ एआई के खतरे तक नहीं, बल्कि इस पर है कि एआई का फायदा गरीब और मध्यम वर्ग तक कैसे पहुंचे। सरकार ने इसे एआई विभाजन को खत्म करने की दिशा में एक कदम बताया है। यानी तकनीक से लैस और तकनीक रहित लोगों के बीच दूरी कम हो।

