राजधानी दिल्ली अब इलेक्ट्रिक मोबिलिटी (EV) को तेजी से अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। दिल्ली सरकार अपनी नई Electric Vehicle Policy 2.0 को बेहतर बनाएगी। केंद्र सरकार के PM ई-ड्राइव योजना के जरिये राजधानी में ईवी इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत किया जाएगा।
केंद्रीय और राज्य निवेश का बड़ा पैकेज
केंद्र की PM ई-ड्राइव योजना के तहत कुल 4,391 करोड़ रुपये की राशि 14,028 इलेक्ट्रिक बसों के लिए आवंटित की गई है, वहीं 2,000 करोड़ रुपये ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के लिए दिए जाएंगे। इसके अलावा 780 करोड़ रुपये वाहन परीक्षण एजेंसियों के उन्नयन में खर्च होंगे।
ईवी चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार
दिल्ली में फिलहाल लगभग 8,998 चार्जिंग पॉइंट हैं, जबकि आवश्यकतानुसार उन्हें कमोबेश 36,177 तक होना चाहिए। सरकार का लक्ष्य है कि इस साल के अंत तक चार्जिंग प्वाइंट की संख्या 16,070 तक पहुंचाई जाए।
इसके अलावा दिल्ली सरकार Outer Ring Road (लगभग 47 किमी) पर हर 5 किमी पर फास्ट चार्जिंग स्टेशन वाला EV कॉरिडोर भी विकसित करेगी ताकि ड्राइवरों को ‘रेंज-एंग्जायटी’ यानी बैटरी खत्म होने का डर कम हो।
सब्सिडी लाभ में वृद्धि
PM ई-ड्राइव योजना के तहत इलेक्ट्रिक वाहनों पर सब्सिडी इस प्रकार है:
दो-पहिया ईवी: 5,000 रुपये प्रति kWh, अधिकतम 10,000 रुपये प्रति वाहन
तीन-पहिया ईवी (ई-रिक्शा/ई-कार्ट): 5,000 रुपये प्रति kWh, अधिकतम 25,000 रुपये
एल5 श्रेणी (कार्गो/पैसेंजर): 5,000 रुपये प्रति kWh, अधिकतम 50,000 रुपये प्रति वाहन
इन सब्सिडी का लाभ पाने के लिए वाहन का पंजीकरण और निर्धारित फैक्ट्री मूल्य सीमा का पालन जरूरी होगा।
राज्य और केंद्र सब्सिडी का लिंक
PM ई-ड्राइव में सीधे राज्य सरकारों को सब्सिडी नहीं दी जाती, इसलिए दिल्ली सरकार इसे अपने पोर्टल के माध्यम से केंद्र की सहायता के साथ राज्य सब्सिडी से जोड़ने की योजना बना रही है ताकि खरीदारों को अधिकतम वित्तीय मदद मिल सके।
ई-बसों का लक्ष्य और कार्यक्रम
दिल्ली सरकार का लक्ष्य है कि:
- मार्च 31, 2026 तक: 6,000 ई-बसें
- मार्च 31, 2027 तक: 7,500
- मार्च 31, 2028 तक: 10,400
- मार्च 31, 2029 तक: 14,000 ई-बसें सड़कों पर हों
इसके साथ ही पॉलिसी में बैटरियों के निपटान, पुराने वाहन हटाने यानी स्क्रैप करने के लिए इंसेंटिव और ईवी उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया जाएगा।
इस नीति के लागू होने से दिल्ली में प्रदूषण कम होगा, ईंधन पर निर्भरता घटेगी और नागरिकों को साफ-सुथरी, टिकाऊ और सस्ती मोबिलिटी के विकल्प मिलेंगे। योजनाओं के लागू होने से दिल्ली की ट्रांसपोर्ट व्यवस्था में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी धीरे-धीरे बढ़ेगी।