28 फरवरी 2026, शनिवार को ऑपरेशन ‘एपिक फ्यूरी’ के तहत अमेरिका और इजरायल ने ईरान की राजधानी तेहरान में हमले किए। इस हमले के दौरान ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई।
जिसके बाद ईरान ने इजरायल समेत एक साथ कई खाड़ी देशों में मिसाइलों की बौछारें करनी शुरू कर दी, जिससे मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ गया। इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान में किए हमले का आज सातवां दिन है। सातवें दिन भी मिडिल ईस्ट में तनाव कम होने की बजाय और बढ़ता ही जा रहा है।
दरअसल, मिडिल ईस्ट में जारी जंग न केवल खाड़ी देशों को अपनी चपेट में ले लिया है, बल्कि वैश्विक वित्तीय बाजारों और तेल आपूर्ति शृंखला को भी हिलाकर रख दिया है।
अमेरिका और इजरायल का दावा है कि उनका अभियान- जिसे ऑपरेशन एपिक फ्यूरी नाम दिया गया है- ईरान की सेना को पंगु बना रहा है। जबकि ईरानी सेना का कहना है कि वह खाड़ी क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन हमले जारी रखे हुए है। सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) के अनुसार, इस युद्ध के शुरुआती 100 घंटों की सैन्य लागत ही 3.7 अरब डॉलर के पार पहुंच गई है।
अब तक क्या-क्या हुआ?
इजरायल-अमेरिका द्वारा ईरान पर किए हमले का आज सातवां दिन है। शनिवार को हमले शुरू होने के बाद से ईरान में 1,230 से अधिक लोग मारे गए हैं। इजरायली सेना ने दावा किया है कि उसने ईरान की लगभग 80 प्रतिशत हवाई रक्षा प्रणालियों को ध्वस्त कर दिया है। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद उनके उत्तराधिकार का सवाल बना हुआ है। क्योंकि खामनेई के बेटे मोजतबा के पद संभालने वाली बात अमेरिका को रास नहीं आ रही है। ट्रंप ने कहा, “हम ऐसा व्यक्ति चाहते हैं जो ईरान में सद्भाव और शांति लाए।” ट्रंप ने स्पष्ट रूप से मोजतबा को एक अस्वीकार्य विकल्प बताया।
ईरान ने दी चेतावनी
ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव अली लारीजानी ने हजारों अमेरिकी सैनिकों को मारने और बंदी बनाने की धमकी देते हुए कहा कि ईरानी सेना संभावित अमेरिकी जमीनी आक्रमण की प्रतीक्षा कर रही है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि अमेरिका के साथ बातचीत करने का कोई कारण नहीं है, और उस पर भरोसा नहीं किया जा सकता है।

