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अस्पताल ने लगाए फर्जी चार्ज, मरीज की एक तरकीब से 1 लाख का बिल झटके में हुआ आधा, जानिए पूरा मामला

 क्या आपने कभी सोचा है कि हॉस्पिटल का बिल चेक करने में सिर्फ 5 मिनट लगाने से आप हजारों रुपये बचा सकते हैं? एक मरीज ने यही करके दिखाया। जनवरी में एक छोटी सी आउटपेशेंट प्रोसीजर कराने के बाद उनके पास 1 लाख रुपये का बिल आया।

बीमा कट जाने के बाद भी इतनी रकम देखकर वे पेमेंट प्लान करने ही वाले थे, लेकिन ऑफिस के एक सहकर्मी ने सलाह दी कि पहले आइटमाइज्ड बिल मांगो। बस यही एक कदम से उनके 44 हजार रुपये बचा गया।

छह पेज के बिल में निकली दो बड़ी गलतियां

हॉस्पिटल ने मरीज को छह पेज का पूरा डिटेल बिल दिया। ध्यान से पढ़ते ही उनकी आंखें खुली रह गईं। बिल में एक एनस्थीसिया कंसल्टेशन का चार्ज 31,430 रुपये था। मरीज ने कभी कोई ऐसी सलाह ली ही नहीं थी। साथ ही एक सप्लाई किट का चार्ज दो बार लगाया गया था।

गलत चार्ज हटा बिल घटकर हुआ 57 हजार 

दो हफ्ते बाद हॉस्पिटल ने दोनों गलत चार्ज हटा दिए। 1 लाख रुपये का बिल घटकर 57 हजार रुपये रह गया। मरीज ने कहा कि मेरे पास पैसे थे इसलिए पूरा बिल जमा कर दिया, लेकिन अगर मैंने आइटमाइज्ड बिल नहीं मांगा होता तो ये गलती कभी सामने ही नहीं आती। बिलिंग एरर बहुत आम हैं, हॉस्पिटल उम्मीद करते हैं कि आप चेक ही नहीं करेंगे।

मरीज ने सोशल मीडिया पर सबको सलाह दी कि हमेशा सिर्फ समरी बिल नहीं, पूरा आइटमाइज्ड बिल मांगें। बस 5 मिनट का काम है, लेकिन हजारों रुपये बच सकते हैं। बिलिंग एरर पागलपन की हद तक आम हैं और हॉस्पिटल इसी पर भरोसा करते हैं कि लोग नहीं देखेंगे।

सोशल मीडिया पर गरमागरम बहस

पोस्ट वायरल होते ही कमेंट्स की बाढ़ आ गई। लोग अपनी प्रतिक्रिया देने लगे और कहा कि ये गलती नहीं, जानबूझकर किया जाता है। एक यूजर ने लिखा कि आइटमाइज्ड बिल मांगो और देखो बिल 20% गिर जाता है।

एक तीसरे व्यक्ति ने टिप्पणी की कि सबसे ज़्यादा निराशा की बात यह है कि इंश्योरेंस कंपनियां भी इसकी परवाह नहीं करतीं। मैंने उन्हें जानकारी देने के लिए फोन किया, लेकिन उनका रवैया ऐसा था, जो भी हो। हमने तो पेमेंट कर ही दिया है।

मतलब, आप प्रीमियम और सही कवरेज के मामले में तो मुझसे बहस करेंगे, लेकिन अस्पताल से नहीं लड़ेंगे? जो सीधे-सीधे आपके साथ धोखाधड़ी कर रहा है।

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