इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी में कहा है कि प्रथम दृष्टया किसी विवाहित पुरुष का किसी वयस्क महिला के साथ उसकी सहमति से लिव-इन रिलेशनशिप में रहना अपराध नहीं है। इस पर उसे किसी अपराध के लिए अभियोजित नहीं किया जा सकता। नैतिकता , सामाजिक अवधारणा और कानून को अलग-अलग रखना होगा।
खंडपीठ ने जोड़े की गिरफ्तारी पर लगाई रोक
न्यायमूर्ति जेजे मुनीर तथा न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने यह टिप्पणी शाहजहांपुर निवासी अनामिका तथा नेत्रपाल की याचिका की सुनवाई के दौरान की है। कोर्ट ने जोड़े की गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए अनामिका के परिवार वालों से कहा है कि वह याचीगण को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाए, न ही उनके घर में घुसें।
जानें क्या है पूरा मामला
मामले से जुड़े तथ्य यह हैं कि याची 18 साल की है। उसकी मां की तरफ थाना जैतिपुर में दर्ज कराई गई एफआइआर में आरोप है कि विवाहित नेत्रपाल उसकी बेटी को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया है। चूंकि वह विवाहित पुरुष है इसलिए अन्य महिला के साथ रहने में अपराध का आरोपित हो सकता है। कोर्ट ने दोनों याचीगण के संयुक्त शपथ पत्र को रिकार्ड पर लेने के बाद पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिया कि वे याचीगण की सुरक्षा सुनिश्चित करें।
अगली सुनवाई आठ अप्रैल को होगी
हाई कोर्ट ने इस संदर्भ में शक्तिवाहिनी बनाम यूनियन ऑफ इंडिया (2018) मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया, जिसमें पुलिस अधीक्षक को दो वयस्कों की सुरक्षा के लिए विशेष दायित्व सौंपा गया है। राज्य सरकार व शिकायतकर्ता को जवाबी शपथ पत्र दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय देते हुए कोर्ट ने अगली सुनवाई तिथि आठ अप्रैल नियत की है। साथ ही अनामिका के परिवार वालों को आदेश दिया है कि वह याचीगण के घर में प्रवेश करने या उनसे सीधे या किसी भी इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से संपर्क नहीं करें। कहा है कि पुलिस अधीक्षक सुरक्षा के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे।
‘कोई भी दो बालिग अपनी मर्जी से साथ रह सकते’
कोर्ट ने कहा, याची ने एसपी को अपने परिवार से जीवन को खतरे की शिकायत की थी। कहा था वह बालिग है अपनी मर्जी से लिव इन में रह रही है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। कोर्ट ने साफ किया कि कोई भी दो बालिग अपनी मर्जी से साथ रह सकते हैं, यह कानून में अपराध नहीं है। कोर्ट, कानून के तहत अपराध पर ही कार्रवाई कर सकता है।

