Rohingya मुस्लिम शरणार्थी और Bangladeshi नागरिकों की भीड़ से भरी Overloaded नाव पलटी ।

बांग्लादेश के टेकनाफ इलाके से मलेशिया की ओर जा रही एक ओवरलोडेड ट्रॉलर नाव में रोहिंग्या मुसलमान शरणार्थी और बांग्लादेशी नागरिकों की भीड़ भरी हुई थी, जिसमें पुरुष, महिलाएं और बच्चे शामिल थे। अनुमान के मुताबिक नाव पर कुल 250 से 280 लोग सवार थे, जो बेहतर जीवन की तलाश में इस खतरनाक समुद्री यात्रा पर निकले थे। लेकिन अंडमान सागर में भारी हवाओं, खराब समुद्री हालात और अत्यधिक भीड़भाड़ के कारण नाव पलट गई और डूब गई। संयुक्त राष्ट्र के शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) और इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन फॉर माइग्रेशन (IOM) ने संयुक्त बयान में इस घटना को एक बड़ी मानवीय त्रासदी बताया है, जिसमें कम से कम 250 लोग लापता हैं और उनकी जान जाने का गंभीर खतरा मंडरा रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स और बचाव अभियान के अनुसार, नाव के डूबने के बाद कुछ लोग समुद्र में 36 घंटे से ज्यादा समय तक ड्रम, लकड़ी के टुकड़ों और मलबे का सहारा लेकर तैरते रहे। 9 अप्रैल 2026 को बांग्लादेश कोस्ट गार्ड का जहाज एम.टी. मेघना प्राइड (जो इंडोनेशिया की ओर जा रहा था) ने अंडमान द्वीपों के पास गहरे पानी में तैरते इन 9 लोगों को बचाया। इनमें 3 रोहिंग्या शरणार्थी और 6 बांग्लादेशी नागरिक शामिल हैं, जिनमें एक महिला भी थी। बचाए गए लोगों में से एक, रफीकुल इस्लाम ने बताया कि वे करीब 36 घंटे तक समुद्र में तैरते रहे, जहाज से तेल रिसने की वजह से उनके शरीर पर जलन हो गई थी और वे लगभग दो दिन तक मौत से जूझते रहे।

बचाव दल ने बताया कि नाव चार दिन समुद्र में रहने के बाद तूफान में फंस गई थी। रोहिंग्या शरणार्थी अक्सर म्यांमार में उत्पीड़न और हिंसा से बचने के लिए बांग्लादेश से मलेशिया, थाईलैंड या अन्य देशों की ओर ऐसी नावों से पलायन करते हैं, लेकिन मानव तस्करों द्वारा ओवरलोडेड नावों में भेजे जाने से ऐसी दुर्घटनाएं आम हैं। बांग्लादेश कोस्ट गार्ड ने सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है, लेकिन अब तक और कोई बचे हुए नहीं मिले हैं। संयुक्त राष्ट्र ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए फंडिंग बढ़ाने और बांग्लादेश के होस्ट कम्युनिटी को सपोर्ट देने की अपील की है, ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदियां रोकी जा सकें।

यह घटना रोहिंग्या संकट की क्रूर हकीकत को फिर से उजागर करती है, जहां हजारों लोग मौत के मुंह में कूदने को मजबूर हैं सिर्फ एक बेहतर जिंदगी की उम्मीद में। लापता लोगों में ज्यादातर बच्चे और महिलाएं भी शामिल बताए जा रहे हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है।

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