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दिल्लीवासियों को पानी की समस्या से मिलेगा छुटकारा, मंत्री प्रवेश वर्मा ने बताया पूरा प्लान 

दिल्ली में पानी की कमी को दूर करने के लिए दिल्ली सरकार सीवेज उपचार संयंत्रों (एसटीपी) के उपचारित पानी के गैर पेयजल कार्य में करने की योजना तैयार की जा रही है। अगले दो वर्षों में इस योजना को जमीन पर लाने का लक्ष्य रखा गया है।

जल मंत्री प्रवेश वर्मा ने प्रेसवार्ता में कहा कि पिछले कुछ दिनों से दिल्ली पानी की कमी है। जनसंख्या के आधार पर दिल्ली में 1250 एमजीडी पानी की आवश्यकता। इसकी तुलना में एक हजार एमजीडी मिलता है। हरियाणा से बात करने से सीएलसी और डीएसबी से एक हजार क्यूसेक पानी मिल रहा है। यमुना में पानी की कमी के वजीराबाद जलाशय का जलस्तर 674.15 की जगह 668 फीट रह गया है। वजीराबाद और चंद्रावल डब्ल्यूटीपी के लिए यमुना से पहले 209 क्यूसेक पानी लिया जाता था। जलाशय का जलस्तर कम होने से इसकी जगह इस समय मात्र 75 क्यूसेक पानी मिल रहा है। पहले हरियाणा से सीएलसी डीएसबी नहरों के माध्यम से 920 क्यूसेक पानी मिलता था अब लगभग एक हजार क्यूसेक हो गया। इस पानी को वजीराबाद और चंद्रावल की तरफ मोड़ा गया है। इसके बाद भी इन दोनों संयंत्रों को लगभग 50 एमजीडी कम पानी मिल रहा है।

आठ कमांड सेंटर में बांटा गया दिल्ली

उन्होंने कहा कि दिल्ली में पानी की समस्या दूर करने के लिए कई परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है इसके अंतर्गत पुरानी पाइप लाइनों को बदला जा रहा है। दिल्ली को आठ कमांड सेंटर में विभाजित कर जल प्रबंधन में सुधार का काम किया जा रहा है। इसके अंतर्गत वजीराबाद और चंद्रावल कमांड सेंटर की प्रक्रिया शुरू हो गई है। अन्य का अध्ययन किया जा रहा है।

रेणुका डैम से कब मिलेगा पानी?

दिल्ली के हैदरपुर तक सीएलसी और डीएसबी से पानी। सीएलसी में पानी की बर्बादी मात्र पांच प्रतिशत, लेकिन डीएसबी में 45 प्रतिशत तक है। इस ओपन कैनाल की जगह पाइप लाइन से पानी लाने के लिए IIT रुड़की से अध्ययन कराया जा रहा है। इस परियोजना के लिए दिल्ली सरकार फंड देगी और हरियाणा सरकार यह काम करेगी। 2032 तक रेणुका डैम से पानी मिलेगा। इससे पहले ड्यूल पाइप लाइन पर काम शुरू किया गया है। डीपीआर तैयार किया जा रहा है।

प्रवेश वर्मा का दावा- दोगुना फेरे लगा रहे हैं जल टैंकर

नए एसटीपी प्लांट ऐसे होंगे जिसमें न दुर्गंध होगा और न प्रदूषण। स्कीम तैयार की जा रही है। सबसे पहले सरकारी भवनों में ड्यूल पाइप लाइन सिस्टम को लागू किया जाएगा। इसके बाद आवासीय सोसाइटी में। इसे लागू करने वाली सोसाइटी को बिल में छूट दी जाएगी। एक साल में नए एसटीपी प्लांट लगाने और उसके एक साल में ड्यूल पाइप लाइन सिस्टम लग जाए। पाइप लगने तक एसटीपी से टैंकर के माध्यम से उपचारित पानी सरकारी भवनों और सोसाइटी तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाएगी।

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