Site icon

गेमिंग के चक्कर में फिशिंग का शिकार हो रहे मासूम, एक गलत क्लिक और हैक हो गया मां का मोबाइल

डिजिटल दौर में मोबाइल गेम्स बच्चों के मनोरंजन का सबसे पसंदीदा साधन बन चुके हैं, लेकिन यही शौक साइबर बदमाशों का हथियार भी बन गया है।

इसको लेकर साइबर दोस्त ने एक विशेष कॉमिक शृंखला के जरिए बच्चों और अभिभावकों को आगाह किया है कि कैसे गेमिंग के चक्कर में मासूम बच्चे फिशिंग के खतरनाक जाल में फंस रहे हैं।

जारी इस जागरूकता अभियान की कहानी के मुख्य पात्र 13 वर्षीय आरव के माध्यम से एक बेहद आम साइबर फ्रॉड को दर्शाया गया है जो किसी भी आम परिवार के साथ घटित हो सकता है।

आरव अपनी मां के मोबाइल पर ऑनलाइन गेम खेल रहा था और जैसे ही वह जीत के आखिरी स्तर पर पहुंचा कि स्क्रीन पर एक लुभावना संदेश चमका बस एक क्लिक करें, कॉइन्स खरीदें और अगला लेवल अभी अनलॉक करें।

आरव ने जैसे ही बिना सोचे-समझे भुगतान वाले बटन पर क्लिक किया। फोन की स्क्रीन अचानक फ्रीज हो गई और बैकग्राउंड में उसका निजी डेटा चोरी होना शुरू हो गया। तुरंत बाद मोबाइल अपने आप बंद होकर रीस्टार्ट होने लगा।

डर और घबराहट के मारे आरव ने इस बात को अपनी मां से छुपाया और फोन जेब में रखकर घर से बाहर पार्क की तरफ भाग गया। उसकी परेशानी देखकर उसके जागरूक दोस्तों ने, जो एक साइबर सेफ्टी क्लब चलाते हैं, उसका फोन चेक किया। दोस्तों ने बारीकी से जांच कर बताया कि यह एक फर्जी यूआरएल और नकली डोमेन वाला फिशिंग लिंक था। जिसके जरिए हैकर्स ने उसकी मां के फोन का पूरा कंट्रोल अपने हाथ में ले लिया था। दोस्तों की सही सलाह और हिम्मत देने पर आरव ने घर लौटकर अपनी गलती मानी और माता-पिता को पूरी सच्चाई बताई।

इसके बाद बिना गुस्सा किए राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई। घटना से सीख लेते हुए साइबर विशेषज्ञों ने बच्चों और अभिभावकों के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं कि इंटरनेट की दुनिया मजेदार जरूर है, लेकिन इसकी हर गली सुरक्षित नहीं होती।

बच्चों को संदेश या चैट में आए किसी भी अज्ञात लिंक पर कभी भी सीधे क्लिक नहीं करना चाहिए। विशेषकर तब जब वह पैसे या पासवर्ड मांग रहे हों, क्योंकि असली कंपनियां इस तरह के रैंडम लिंक से कभी पेमेंट नहीं मांगतीं।

विशेषज्ञों का साफ कहना है कि ऑनलाइन गेम में हार जाना बेहतर है, बजाए इसके कि आप अपने परिवार का निजी डेटा खो बैठें। अनजाने में ऐसी कोई गलती हो भी जाए तो उसे छुपाने या डरने के बजाय तुरंत अपने माता-पिता या शिक्षकों को बताएं।

Exit mobile version