Site icon

‘न तो जरूरत से ज्यादा बल इस्तेमाल करने वाले अधिकारी और न ही आपराधिक प्रदर्शनकारी को बचाया जाना चाहिए’, SC की टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि न तो जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल करने वाले पुलिस अफसर को और न ही छात्र विरोध प्रदर्शन की आड़ में शामिल किसी पक्के अपराधी को बचाया जाना चाहिए।

ये टिप्पणियां 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर नीट-यूजी विरोध प्रदर्शन से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान की गईं। शीर्ष अदालत ने कहा कि राज्य छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को बंद करने या वापस लेने के लिए स्वतंत्र हैं, बशर्ते ऐसा कानून के अनुसार किया जाए।

पैलेट गन के इस्तेमाल पर गाइडलाइंस तय कर सकती है अदालत

अदालत ने यह भी संकेत दिया कि वह विरोध प्रदर्शनों के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल पर गाइडलाइंस तय कर सकती है। विरोध प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल के आरोपों पर सीजेआई ने कहा कि अदालत गाइडलाइंस जारी करने पर विचार कर रही है। उन्होंने कहा, “हम इसके इस्तेमाल के तरीके पर एक प्रोटोकॉल तय करना चाहेंगे।”
चीफ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच ने साफ किया कि आपराधिक इतिहास शब्द का मतलब केवल गंभीर और जघन्य अपराधों से है, ताकि उन चिंताओं को दूर किया जा सके कि मामूली या राजनीतिक मामलों में फंसे छात्रों को राहत से वंचित किया जा सकता है।

‘संतुलन बनाना चाहती है अदालत’

सुनवाई के दौरान सीजेआई ने जोर दिया कि अदालत शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा और गंभीर अपराधियों की जवाबदेही तय करने के बीच संतुलन बनाना चाहती है। उन्होंने कहा, “जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल करने वाले पुलिस अफसर को बेवजह सुरक्षा नहीं मिलनी चाहिए और ऐसा भी नहीं होना चाहिए कि छात्र विरोध प्रदर्शन की आड़ में किसी पक्के अपराधी को भी सुरक्षा मिल जाए।”

बेंच ने गौर किया कि याचिकाएं प्रदर्शनकारियों (जिन्होंने पुलिस द्वारा जरूरत से ज्यादा बल इस्तेमाल करने का आरोप लगाया था) और पुलिसकर्मियों (जिन्होंने हिंसा के दौरान घायल होने का दावा किया था) दोनों की तरफ से दायर की गई थीं।

केंद्र सरकार ने भी दिया आश्वासन

केंद्र की ओर से पेश होते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि केंद्र सरकार अपने उस आश्वासन पर कायम है कि छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामलों को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा, सिवाय उन मामलों के जिनमें गंभीर आपराधिक अपराध शामिल हों।

उन्होंने कहा कि गंभीर और जघन्य अपराधों के इतिहास वाले 2,700 से ज्यादा लोगों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस नहीं ली जाएंगी। मेहता ने यह भी कहा कि इस मुद्दे पर सरकार के रुख को लेकर गलतफहमी हुई थी।

उन्होंने कहा, “जिन छात्रों का आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है उनके खिलाफ मामलों को सरकार सुलझाने को तैयार है। उन्हें सरकार के साथ बातचीत करने दें। कुछ लोग मामले को गरमाए रखना चाहते हैं, इसलिए हमें कानूनी सलाह को लेकर सावधान रहना होगा।”

Exit mobile version