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क्या मुंबई अंडरवर्ल्ड में पैदा हुए खालीपन को भर रहे हैं उत्तर भारतीय सिंडिकेट? 90 के दशक की हो रही चर्चा

पिछले दो दशकों से मुंबई में अंडरवर्ल्ड के लगभग सभी बड़े गिरोह खत्म होने के बाद बॉलीवुड ने राहत की सांस ली थी। एक समय था जब ये गिरोह जबरन वसूली के जरिए फिल्म इंडस्ट्री से सबसे ज्यादा कमाई करते थे।

लेकिन रविवार शाम एक्टर टाइगर श्रॉफ पर हुई ताबड़तोड़ फायरिंग ने यह साबित कर दिया है कि अंडरवर्ल्ड एक बार फिर नए चेहरों के साथ सक्रिय हो गया है। इस बार उत्तर भारत के गिरोह इस पुराने खालीपन का फायदा उठाने की कोशिश में हैं। इस घटना ने एक बार फिर फिल्म जगत की हस्तियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

फायरिंग में लॉरेंस बिश्नोई गैंग का हाथ

रविवार को जब अभिनेता टाइगर श्रॉफ जुहू में एक स्पोर्ट्स इवेंट से बाहर निकल रहे थे, तभी तीन अज्ञात हमलावरों ने उनकी कार पर गोलियां चला दीं। गनीमत यह रही कि टाइगर श्रॉफ, जो कार में आगे बैठ थे, बाल-बाल बच गए। हालांकि, इस फायरिंग की चपेट में आने से दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। इस घटना के कुछ ही मिनटों बाद, लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े अनमोल बिश्नोई का एक सोशल मीडिया पोस्ट सामने आया, जिसमें उसने इस गोलाबारी की जिम्मेदारी ली। इस घटना उस पुराने खौफनाक दौर की याद ताजा कर दी, जब हिंदी फिल्म उद्योग पूरी तरह से अंडरवर्ल्ड के साए में जीता था।

डर का वो पुराना दशक

1990 के दशक के आखिर और 2000 के दशक की शुरुआत का समय बॉलीवुड के लिए किसी काले साये से कम नहीं था। उस दौर में जबरन वसूली और निजी दुश्मनी के कारण फिल्म निर्माताओं और कलाकारों को लगातार निशाना बनाया जाता था।

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