Kullu : अब जिला कुल्लू के दुर्गम और पहाड़ी इलाकों में आपदा राहत कार्यों को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए इसरो (भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन) के आधुनिक हाई-टेक ड्रोन उड़ान भरेंगे। यह पहल जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) और जिला परिषद के संयुक्त प्रयासों से संभव हुई है, जिसे क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत आपदा जैसी परिस्थितियों में मलाणा, शाकटी-मरौड़, तियुन, स्मालंग जैसे अति दुर्गम गांवों तक खाद्य सामग्री, दवाइयां और आवश्यक मेडिकल सुविधाएं ड्रोन के माध्यम से पहुंचाई जा सकेंगी। इन ड्रोन की उड़ान क्षमता करीब 25 से 30 किलोमीटर तक होगी, जिससे सड़क मार्ग बंद होने की स्थिति में भी राहत पहुंचाना आसान होगा। योजना को लेकर एक अहम कदम उठाते हुए जिला परिषद सदस्य एवं डीडीएम के को-चेयरमैन पंकज परमार के नेतृत्व में सात सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल इसरो मुख्यालय के लिए रवाना हो गया है। इस दल में मलाणा के तीन युवा और शाकटी-मरौड़ क्षेत्र के तीन प्रतिनिधि शामिल हैं। यह प्रतिनिधिमंडल केरल के तिरुवनंतपुरम स्थित इसरो केंद्र में वैज्ञानिकों के साथ बैठक करेगा। बैठक के बाद कुल्लू में इन ड्रोन का ट्रायल भी किया जाएगा। इस संबंध में जिला परिषद अध्यक्ष पंकज परमार ने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि यह जिला कुल्लू के आपदा प्रबंधन और जिला परिषद के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि आपदाओं से निपटने के लिए इसरो की ओर से यह प्रस्ताव मिलना अपने आप में गर्व की बात है। यदि यह योजना सफलतापूर्वक लागू होती है, तो न केवल कुल्लू बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश के लिए यह एक वरदान साबित होगी।
उन्होंने आगे कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन, भारी बारिश और बर्फबारी के कारण कई बार गांवों का संपर्क कट जाता है। ऐसे में यह ड्रोन तकनीक आपदा के समय जीवन रक्षक साबित होगी और राहत कार्यों को तेज व सुरक्षित बनाएगी। Report by – Shweta
